📅 रायपुर | 14 जुलाई 2025 (cg news focus): छत्तीसगढ़ में कृषि का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब किसान सिर्फ परंपरागत धान की खेती पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि कम लागत और अधिक पोषण देने वाली वैकल्पिक फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसी ही एक फसल है — कोदो, जिसे अब राज्य के ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अपनाया जा रहा है। 📈 गांव-गांव में कोदो की खेती का बढ़ता रुझान बालोद जिले के गुरूर विकासखंड के ग्राम बड़भूम, पेटेचुवा, दुग्गा बाहरा और कर्रेझर जैसे गांवों में कोदो की खेती तेजी से बढ़ी है। किसान कोदो को कम खर्च, कम मेहनत और बेहतर रिटर्न का साधन मान रहे हैं। कृषक श्री धनीराम, ग्राम दुग्गा बाहरा से, जो पहले केवल धान की खेती करते थे, अब उन्होंने खरीफ वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (रफ्तार) के अंतर्गत 3 एकड़ में कोदो की खेती शुरू की है। 🌿 कोदो: पोषण, मुनाफा और स्वास्थ्य का संगम ✔️ कोदो के फायदे: स्वास्थ्यवर्धक: फाइबर, प्रोटीन, आयरन, विटामिन B, मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर रोगों से बचाव: मधुमेह, मोटापा और हृदय रोग में लाभकारी कम लागत: रासायनिक खाद और कीटनाशकों की जरूरत बहुत कम पर्यावरण अनुकूल: पानी की कम खपत और जलवायु सहनशील अधिक मुनाफा: कम लागत में प्रति एकड़ ज्यादा लाभ 💰 सरकार का समर्थन और किसानों को लाभ राज्य सरकार द्वारा वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत धान छोड़कर कोदो अपनाने वाले किसानों को प्रति एकड़ ₹11,000 का अनुदान प्रदान किया जा रहा है। इससे किसानों को नई तकनीकें अपनाने, बीज खरीदने और खेत तैयार करने में आर्थिक मदद मिल रही है। श्री धनीराम जैसे किसान अब कम लागत में अधिक मुनाफा कमाकर उदाहरण बन रहे हैं। Top News-CG News Focus 📊 कोदो उत्पादन की संभावनाएं और सरकारी पहल कृषि विभाग गांव-गांव जाकर किसानों को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दे रहा है। उच्च भूमि में कोदो की खेती से उत्पादन क्षमता अधिक होती है। विभाग को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में कोदो का रकबा दोगुना हो सकता है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि कोदो को "सुपर फूड" के रूप में पूरे देश में ब्रांड किया जाए। 🔍 (cg news focus)